कूलर के कारोबार ने दिलाई पहचान…यूसुफ भाई का संघर्ष हमें सिखाता है कि शिक्षा की कमी या गरीबी कभी भी हमारी सफलता की राह में बाधा नहीं बन सकती, अगर हमारे पास दृढ़ संकल्प, कड़ी मेहनत और ईमानदारी हो

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कमलेश यादव : आगे बढ़ने का जज्बा और कठिनाइयों का सामना करने की इच्छा रखने वाले यूसुफ भाई ने अपने काम से साबित कर दिया कि निरंतर प्रयास कभी व्यर्थ नहीं जाता हैं। “बाबा ताज कूलर हाऊस” के संचालक यूसुफ भाई की कहानी संघर्ष, मेहनत और संकल्प की एक प्रेरणादायक गाथा है। यूसुफ खान छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले के निवासी हैं, और उनकी दुकान प्यारे लाल चौक पर स्थित है। उनकी ज़िन्दगी की शुरुआत काफी मुश्किलों और गरीबी में हुई थी, लेकिन उन्होंने अपनी मेहनत और दृढ़ निश्चय से अपने व्यापार को सफलता की ऊंचाइयों तक पहुंचाया।

सत्यदर्शन लाइव को उन्होंने बताया कि उनका बचपन गरीबी में बीता। परिवार की आर्थिक स्थिति इतनी खराब थी कि उन्हें छोटी उम्र में ही काम करना पड़ा। पढ़ाई के मामले में भी उन्हें काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। सिर्फ छठी कक्षा तक पढ़ाई कर पाए और उसमें भी फैल हो गए। लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी। उनके मन में हमेशा से कुछ बड़ा करने की चाह थी।

उन्होंने 2016 में मात्र 12 कूलर से कारोबार की शुरुआत की थी। अपने हुनर ​​और लगन से उन्होंने धीरे-धीरे इस क्षेत्र में अनुभव हासिल किया। इसके बाद ईमानदारी से की गई उनकी मेहनत रंग लाई और अब आस-पास के 9 जिलों से लोग उनके बनाए कूलर खरीदने आते हैं। गुणवत्तापूर्ण सेवा उनकी पहली प्राथमिकता रही है। यूसुफ भाई का कहना है कि अगर हम सही बजट में अच्छी चीजें देते हैं तो हमें बहुत खुशी मिलती है।

यूसुफ भाई का कहना है कि “मेहनत और सच्चाई के साथ किया गया काम कभी व्यर्थ नहीं जाता। अगर इरादे पक्के हों तो मुश्किलें भी रास्ता बना देती हैं।” उनकी यह प्रेरणादायक यात्रा बताती है कि कोई भी व्यक्ति, चाहे कितनी भी विपरीत परिस्थितियाँ क्यों न हों, अपने सपनों को साकार कर सकता है।

पिताजी की कही बात
यूसुफ़ भाई ने बहुत छोटी सी उम्र में ही छोटे-मोटे काम करना शुरू कर दिया था। उन्होंने मेहनत के महत्व को समझा और उसे अपने जीवन का हिस्सा बना लिया। वह आगे कहते है कि, बचपन में पिताजी मुझे सिखाते थे, “मेरा तो जावे नही और जावे सो मेरा नही”, इसी विश्वास के साथ मैं सब कुछ ऊपर वाले के ऊपर छोड़ देता हूँ।

प्यारे लाल चौक पर स्थित उनकी दुकान “बाबा ताज कूलर हाऊस ” अब राजनांदगांव में एक प्रसिद्ध नाम बन चुका है। उनके बनाए कूलर की गुणवत्ता और उनकी ईमानदारी की वजह से उनके ग्राहक उनसे बहुत खुश रहते हैं। यूसुफ भाई ने अपने कठिन समय से सीखा कि मेहनत, ईमानदारी और धैर्य से हर मुश्किल को पार किया जा सकता है। हालांकि, शुरुआत में उन्हें कई समस्याओं का सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने हर चुनौती का सामना धैर्य और मेहनत से किया। उनकी मेहनत रंग लाई और धीरे-धीरे उनकी दुकान की पहचान बनने लगी।

यूसुफ भाई की संघर्ष हमें सिखाती है कि शिक्षा का अभाव या गरीबी कभी भी हमारी सफलता के मार्ग में बाधा नहीं बन सकती, अगर हमारे पास संकल्प, मेहनत और ईमानदारी हो। उनकी संघर्ष भरी जिंदगी और सफलता की कहानी आज के युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है। यूसुफ भाई ने यह साबित कर दिया कि चाहे परिस्थितियाँ कितनी भी कठिन क्यों न हों, अगर हम अपने लक्ष्य के प्रति समर्पित और मेहनती हैं, तो सफलता निश्चित है।

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