पुस्तक समीक्षा…गीतकार चम्पेश्वर गोस्वामी द्वारा लिखित पुस्तक “गीत के गाड़ी”…समीक्षक-अजय अमृतांशु

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गीत के गाड़ी

चम्पेश्वर गोस्वामी जी के छत्तीसगढ़ी गीत संघरा ” गीत के गाड़ी” पढ़े ला मिलिस आनंद आगे। गोस्वामी जी लेखक,कवि,गीतकार, स्तंभकार, फ़िल्म समीक्षक, पटकथा, संवाद अउ अनुवादक घलो हवय । कुल 51 गीत के ये संघरा मा ज्यादातर श्रृंगारिक गीत हवय फेर येकर सँगे सँग बिहाव गीत, बिदाई ,उत्सव गीत, सोहर, सुवा, छत्तीसगढ़ माटी के गीत, होरी, मेहनतकश किसान के गीत, हास्य बियंग अउ बरसात महीना के गीत घलो हवय। चम्पेश्वर जी मँजे हुये गीतकार आय जेकर बानगी ये किताब म देखे बर मिलथे। गीत अइसन विधा आय जउन मनखे के अन्तस् मा सीधा उतरथे।

चम्पेश्वर जी शुरुवात गणेश वंदना,सरस्वती वंदना,अउ माता के भजन ले करे हवय। ये गीत संघरा विविध रंग म रंगे हवय। पुस्तक के छपाई आकर्षक अउ शब्द मन स्प्ष्ट हवय । गोश्वामी जी मन अपन कई गीत मा सुग्घर सन्देश दे के काम घलो करे हवय-
सबके पीरा ला अपन पीरा मानीन …
सबो परानी ला अपने बरोबर जानीन।
“आ छत्तीसगढ़ ला घूम ले भैया…” गीत म छत्तीसगढ़ के प्रमुख तीर्थ स्थल के सुग्घर वर्णन मिलथे। सोहर गीत अब विलुप्ति के कगार म हे जेला बचाय के भरपूर प्रयास चम्पेश्वर जी करत हवय जेन प्रशंसनीय हे। ये गीत संघरा के सोहर गीत बड़ा मनमोहक हवय-
“झूलना म झूलय /मोर राजा बेटा / झूलय हो…”
बेटी बचाय अउ बेटी ल आघू बढ़ाय के गोठ चम्पेश्वर जी अपन सुवा गीत मा करथे-
बेटी ला आघू बढ़ाबों मोर सुवना..
अड़बड़ वोला पढ़ाबों मोर सुवना..।
छत्तीसगढ़ महतारी के बखान करत गजब सुग्घर गीत आप मन लिखे हवव-
कन कन जेकर मया के अमरीत
गरब ले भरे छाती हे…..
छत्तीसगढ़ के माटी हे ।
युवा मन ऊपर लिखे गीत-
मोर मेहनत सफल होगे गा
मोर जिनगी उजल होगे न…
ये बड़ा प्रेणादायी गीत हवय जेमा अइसन बेटा के चित्रण हवय जेन शहर मा रहिके,पढ़े लिखे के बाद,साहब बने के बाद भी अपन गाँव ल नइ भुलाय । कुल मिलाके ये गीत संघरा ल गोस्वामी जी बड़ मेहनत करके तैयार करे हवय अउ गीतकार अपन उद्देश्य मा सफल भी होय हवय।
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किताब के नाम-गीत के गाड़ी
प्रकाशक- वैभव प्रकाशन रायपुर
कीमत- 300/-
समीक्षक -अजय अमृतांशु
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